बालाघाट जिले में में पानी को लेकर चिंता बढा दी है।  सिंचाई और निर्माण आदि कार्यों में भू.गर्भीय जल के अत्यधिक दोहन के कारण भूगर्भीय जल तेजी से नीचे जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बार रबी की फसल अधिक मात्रा में लगाई गई जिसके कारण यह स्थिति नजर आ रही है, साथ कुछ लोगों का कहना है रेत माफियाओं ने क्षेत्र की नदियों की रेत को अवैज्ञानिक तरीके से निकाल इस समस्या को जन्म दिया । 
इधर इस समस्या को देख  कलेक्टर मृणाल मीना ने जिले में  संपूर्ण जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। जो कि 01 अप्रैल से 31 जुलाई 25 तक प्रभावशील रहेगा। चूंकि जिले में भू-जल का अत्यधिक दोहन होने से जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल का संकट उत्पन्न होने की संभावना है। कलेक्टर श्री मीना द्वारा जारी आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति, संगठन या प्राधिकरण को बिना अनुमति के सार्वजनिक स्त्रोतों से सिंचाई या औद्योगिक प्रयोजन के लिए जल का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, किसी भी व्यक्ति या संगठन को बिना अनुमति के नलकूप खनन करने की अनुमति नहीं होगी।

जिले में नलजल प्रदाय योजनाओं से पेयजल प्रदाय किये जाने के समय मोटरपंप के माध्यम से पानी खींचने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसके लिए ग्राम पंचायत और नगर परिषद को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे घरों से मोटरपंप जप्त कर कार्यवाही सुनिश्चित करें। कलेक्टर श्री मीना द्वारा आदेशित किया गया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर अधिनियम के धारा 9 के तहत 2 वर्ष का कारावास व 2 हजार रुपये का जुर्माना से दंडित किया जाएगा।

न्यूज़ सोर्स : ipm