क्या आप जानते हैं कि देश में असंगठित क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के कल्याण के लिए जो ई-श्रम पोर्टल बनाया गया है, उसपर 30.4 करोड़ से ज्यादा मजूदर रजिस्टर हैं। मतलब की देश की 21 फीसदी आबादी* इस पोर्टल पर मजदूर के रूप में पंजीकृत है और यह वो मजदूर हैं जो असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं। 

यह जानकारी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे द्वारा राज्यसभा में दिए एक प्रश्न के जवाब में सामने आई है।

गौरतलब है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 26 अगस्त 2021 को असंगठित क्षेत्र से जुड़े मजदूरों का व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। यह पोर्टल असंगठित श्रमिकों को पंजीकृत करने में मदद करता है और उन्हें स्व-घोषणा के आधार पर एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) प्रदान करता है। इसे आधार से भी जोड़ा गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक दिसंबर 2024 तक 30.4 करोड़ से ज्यादा मजदूर इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि पंजीकृत मजदूरों में से करीब 53.6 फीसदी महिलाएं हैं, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 46.4 फीसदी है। इसी तरह इस पोर्टल पर पंजीकृत करीब 60 फीसदी मजदूरों की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच है, जबकि 40 से 50 वर्ष के 23.3 फीसदी और 50 वर्ष से अधिक आयु के मजदूरों की संख्या 16.5 फीसदी है।

साझा जानकारी के मुताबिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सबसे ज्यादा असंगठित मजदूर उत्तरप्रदेश के हैं, जिनकी कुल संख्या करीब 8.4 करोड़ है। मतलब की पोर्टल पर रजिस्टर कुल मजदूरों में से अकेले 27.5 फीसदी उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं। इसके बाद बिहार दूसरे स्थान पर है, जहां के करीब तीन करोड़ मजदूरों ने अपने आप को इस पोर्टल पर पंजीकृत किया है।

इसी तरह 2.6 करोड़ के आंकड़े के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश से जुड़े मजदूरों की संख्या 1.8 करोड़ से कुछ अधिक दर्ज की गई है। ऐसे में देखा जाए तो पोर्टल पर रजिस्टर करीब 52 फीसदी असंगठित इन चार राज्यों के हैं, जबकि बाकी 48 फीसदी अन्य राज्यों से जुड़े हैं।

पंजीकृत मजदूरों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र पांचवे स्थान पर है, जहां के 1.7 करोड़ से अधिक मजदूरों ने अपने आप को पंजीकृत किया है। इसी तरह 1.42  करोड़ के साथ राजस्थान छठे और ओडिशा (1.35 करोड़) सातवें स्थान पर है। गुजरात भी इस मामले में ज्यादा पीछे नहीं है, जहां के करीब 1.19 करोड़ असंगठित मजदूर इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। कर्नाटक में भी यह आंकड़ा एक करोड़ से ज्यादा दर्ज किया गया है।

झारखंड से जुड़े असंगठित मजदूरों की संख्या पोर्टल पर करीब 96 लाख दर्ज की गई है। इसी तरह जिन राज्यों से जुड़े मजदूरों की संख्या 50 लाख से ऊपर थी, उनमें तमिलनाडु (88.8 लाख), छत्तीसगढ (85 लाख), आंध्र प्रदेश (81.3 लाख), असम (75.7 लाख), केरल (60 लाख), पंजाब (57.6 लाख) और हरियाणा (53.5 लाख) शामिल थे।

कृषि कार्यों में लगे हैं पंजीकृत 52 फीसदी असंगठित मजदूर

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि इस पोर्टल पर पंजीकृत सबसे ज्यादा असंगठित मजदूर कृषि कार्यों में लगे हैं। इनकी कुल संख्या 15.9 करोड़ के करीब है। मतलब की 52 फीसदी से ज्यादा मजदूर कृषि कार्यों से जुड़े हैं।

इसके बाद घरलू कामों में लगे मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा करीब 2.9 करोड़ दर्ज की गई है। वहीं निर्माण क्षेत्र से जुड़े असंगठित मजदूरों का पंजीकृत आंकड़ा 2.74 करोड़ से अधिक दर्ज किया गया है।

साझा जानकारी के मुताबिक ई-श्रम पोर्टल को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना के साथ भी जोड़ा गया है। पीएम-एसवाईएम 18 से 40 वर्ष की आयु के असंगठित मजदूरों के लिए बनाई एक पेंशन योजना है।

इसके तहत 60 वर्ष की आयु के बाद मजदूरों को 3000 रुपए मासिक पेंशन दी जाती है। इस योजना में जमा 50 फीसदी राशि भारत सरकार द्वारा वहन की जाती है, जबकि शेष श्रमिक द्वारा दी जाती है। इसी तरह प्रवासी श्रमिकों के परिवारों के विवरण को भी इससे जोड़ा गया है।

मजदूरों के कौशल विकास और प्रशिक्षण के लिए इस पोर्टल को स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल के साथ भी जोड़ा गया है, जोकि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित है। इसी तरह ई-श्रम पोर्टल को मायस्कीम पोर्टल के साथ भी जोड़ा गया है।

कुल मिलाकर देखें तो अब तक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 12 योजनाओं को ई-श्रम पोर्टल के साथ जोड़ा जा चुका है।

इनमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि), पीएम आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू), पीएम आवास योजना - ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) शामिल हैं।

Lalit Maurya

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न्यूज़ सोर्स : Ai