वाटरशेड प्रबंधन को जन आंदोलन बनाना सबसे महत्वपूर्ण कार्य

नई दिल्ली। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (WDC - PMKSY 2.0) के अंतर्गत वाटरशेड विकास घटक के राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) के सहयोग से जलवायु अनुकूल एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं से सशक्त बनाना था, जिससे वे जलवायु अनुकूल वाटरशेड प्रबंधन रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त सचिव, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, श्री नितिन खड़े ने किया। उन्होंने कहा, "वाटरशेड प्रबंधन को जन आंदोलन बनाना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। WDC - PMKSY 1.0 के तहत जल संरचनाओं की मरम्मत एक प्राथमिकता होनी चाहिए।"
टेरी के वरिष्ठ निदेशक डॉ. दीपंकर सहारिया ने अपने स्वागत भाषण में वाटरशेड प्रबंधन के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "टेरी ने वर्ष 2000 में अपनी पहली वाटरशेड परियोजना लागू की थी, जिससे समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया।"
उत्तर प्रदेश सरकार के WDC-PMKSY 2.0 के सीईओ डॉ. हीरा लाल ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा, "जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ज्ञान, वित्तीय संसाधन और सामाजिक सहभागिता को जोड़ना आवश्यक है। हमें 'जल, जंगल और ज़मीन' को उसी सम्मान के साथ देखना होगा, जैसा हम अपनी माता को देखते हैं।"
दिल्ली विश्वविद्यालय के पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस स्कूल की प्रोफेसर रूपिंदर ओबेरॉय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल पानी बचाने की पहल से आगे ले जाकर संसाधन प्रबंधन के रूप में अपनाने की जरूरत है।
टेरी के निदेशक अनुशमन ने कार्यक्रम के समापन पर कहा, "हमारे जल संसाधनों को पुनर्जीवित करने की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता सराहनीय है। जल और भूमि हमारी कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और हमें एक स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की जरूरत है।"
तकनीकी सत्रों में जलवायु-लचीले समाधान पर चर्चा
कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:
- कृषि वानिकी और प्रकृति-आधारित समाधान
- जलवायु-स्मार्ट वाटरशेड प्रबंधन प्रथाएं
- IoT और AI के माध्यम से जल निगरानी में ड्रोन तकनीक का उपयोग
- सूक्ष्म सिंचाई और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की रणनीतियां