Friday, 10 July 2020, 8:49 AM

कविता संग्रह

नरक है कचहरी ?

Updated on 9 July, 2020, 7:24
ग्रामीण अंचलों में जमीनी विवाद एवं कई छोटे-मोटे मामलों से अनेकों नागरिकों का जीवन कचहरी के चक्कर काटते ही गुजर जाता है। वहीं न्याय व्यवस्था इतनी लचर है कि  65 जघन्य अपराधों का अपराधिक खुल्ला घूमता है 8 पुलिस वालों को मौत के घाट उतार देता है,हीं दूसरी ओर ही... आगे पढ़े

कवि मन की गुहार, अपना वेतन हमें खुद नियंत्रित करने दो.......?

Updated on 15 June, 2020, 9:03
झांसी 15 जून 2020 गत दिवस अन्तर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की उत्तर प्रदेश ईकाई की पहल पर राष्ट्रीय अध्यक्षा संतोष श्रीवास्तव के संयोजन में "संघर्ष " विषय पर आन लाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसकी मुख्य अतिथि डा. नीरज शर्मा बिजनौर , कार्यक्रम अध्यक्ष डा.पुनीत बिसारिया, झॉंसी , विशिष्ट... आगे पढ़े

इतिहास से कुछ सबक भी सीखें

Updated on 30 May, 2020, 17:48
सुरेन्द्र ठाकरे 📝 धर्म परस्त तो थे सदियों से,           राजतंत्र की घुटन भी देखें|  कम से कम सौ साल तो जी लें,              सांस लोकतंत्र की लेके|| अर्थ धर्म का बदल बदल कर, व्यवस्थाएं इधर-उधर कर| जनता को फिर दरबदर कर, कभी इधर से उधर को फेंके||    कम से... आगे पढ़े

चलो राष्ट्र निर्माण करें

Updated on 4 May, 2020, 18:29
सांझी शहादत-सांझी विरासत ! सांझी प्रकृति-सांझी संस्कृति!! आओ राष्ट्र प्रेम -भक्ति,प्रमाण करें! || चलो राष्ट्र निर्माण करें || ये जाति धर्म के दंगे ! करते रहें चोर-उचंगे !! हम एक आत्मा -एक प्राण करें! || चलो राष्ट्र निर्माण करें || नारीवादी हो, सबकी दृष्टि ! जाति-धर्म ना, देखे बेटी!! अस्मिता देश की त्राण करें! | |चलो राष्ट्र निर्माण करें || विद्या से... आगे पढ़े

मुस्कुराओ परिस्थिति कैसी भी

Updated on 14 January, 2020, 20:27
मुस्कुराओ परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो मुस्कुराओ क्योंकि यह मनुष्य होने की पहली शर्त है । एक पशु कभी भी नहीं मुस्कुरा सकता । रूप कैसा भी क्यों न हो मुस्कुराओ क्योंकि मुस्कान ही आप के चेहरे का वास्तविक श्रंगार है । मुस्कुराओ क्योंकि आपकी हंसी किसी की खुशी का कारण बन... आगे पढ़े

मां बाप का प्यार

Updated on 21 November, 2019, 9:33
मां-बाप ने जब गोद में,  बेटी को है पाया था | देख उसे अपने हाथों से,  सीने से है लगाया था | उसकी नन्ही मासूम आंखों में,  उसने ख्वाहिश जगाया था |   वह नादान सी लड़की थी,  उससे उम्मीद जगा बैठा |  कोई कमी नहीं रहे उसे,  इतनी लाजो से जो पाला था |  अब वह बड़ी सयानी सी, मां बाप... आगे पढ़े

बड़ा मजा आता है

Updated on 13 October, 2019, 23:56
हर एक पहेली को, टेडी मेडी हल करने मे, बड़ा मजा आता हैं |     कक्षा के शांत वातावरण में, चुं चा करने में, बड़ा मजा आता हैं |        तेज हवा के दिशा के,  विपरीत चलने में,   बड़ा मजा आता हैं |     दुश्मन के नाक के नीचे से,... आगे पढ़े

कविता - स्त्री

Updated on 6 October, 2019, 22:53
 एक बार उसे खुश तो रखो,               ख्याल ना रखा तुम्हारा,  तो कहना | एक बार उसे समझ कर तो देखो ,                                                 ... आगे पढ़े

तिरंगा जग से न्यारा

Updated on 26 January, 2019, 23:05
70 वां गणतंत्र हमारा। सारे जग से भाईचारा ।। सदी हमारी ये उज्जवल है। बुद्धि बल और बाहुबल है।। शेर हैं हम सियार नहीं है। पाक जैसे गद्दार नहीं है।। जग में है सम्मान हमारा। उससे सब करते हैं किनारा।। विश्व गुरु फिर बन जाएंगे पहले भी थे फिर कहलाएंगे... आगे पढ़े

जब तलवारें फूलों पर ज़ोर आज़माने लगें,

Updated on 12 September, 2017, 11:22
जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे, जब माँ की कोख से झाँकती ज़िन्दगी, बाहर आने से घबराने लगे, समझो कुछ ग़लत है । जब तलवारें फूलों पर ज़ोर आज़माने लगें, जब मासूम आँखों में ख़ौफ़ नज़र आने लगे, समझो कुछ ग़लत है  जब ओस की बूँदों को हथेलियों पे नहीं, हथियारों की नोंक पर थमना... आगे पढ़े

अरे पावसा तुला मानसावर भरोषा नाहीं क्या

Updated on 12 August, 2017, 18:20
 अरे पावसा  तुला मानसावर भरोषा नाहीं क्या तीन माह से घूम रहा गोल-गोल नदी और नाले हुए झोल-झोल मानव पेड़ों की रक्षा भूल गया क्या अरे पावसा.तुला.......................... आषाढ़ से भादो आया घूम-घूम नहीं दिख रही कहीं बारिश की धूम-धूम तेरी गर्जन पर ताला लग गया क्या अरे पावसा तुला..................... तू पल-पल में बदल रहा अपना भेष कहीं जमकर बरस रहा कहीं... आगे पढ़े

मनहरण घनाक्षरी

Updated on 14 September, 2016, 15:34
हिन्दी मेरी मातृ भाषा , अ से ज्ञ ये परिभाषा। व्याकरण के शब्दों का, ध्यान होना चाहिये।। संज्ञा ,सर्वनाम ,क्रिया, स्वर ,व्यंजन ,विसर्ग। संधि, कर्म, उपसर्ग, भान होना चाहिये।। 52 आखर ,वर्ण ,शब्द, अल्प, अर्ध ,पूर्ण, संग। विराम के भेद सारे, ज्ञान होना चाहिये।। काव्य, छंद, दोहा, रोला, सोरठा ,चोपाई, रस। सवैया ,घनाक्षरी का, मान होना चाहिये।। अंलकार नव छंद, गीत गज़ल,नौ रस। सुर लय तान मिला , गान... आगे पढ़े

उडीसा में घटी मांझी परिवार की घटना पर कविता

Updated on 28 August, 2016, 14:20
दर्द कुछ बड़ गया तोएमर्ज के लिये लिख रहा हूँ। दर्द तो है वेसुमार वश थोड़ा ही लिख रहा हूँ। कही बन न जाये मेरा दर्द मेरी ही नुमाइश । इसीलिए मैं कफन लपेटेएमृत समाज को लिख रहा हूँ मैं कफ़न में लपेटे एभारत को लिये चल पड़ा हूँ। जब सुनीही नहीं पत्थरदिलों  ने मेरी... आगे पढ़े

नन्ही एक कोमल कली

Updated on 30 October, 2015, 13:59
बाग की मैं नन्ही एक कोमल कली हूँ | संस्कारों की छांव के तले मैं पली हूँ || तेरी कृपा की छांव तले जा समाई हूँ | पूजा में कलियाँ भक्ति-भाव से लाई हूँ॥ पूजित स्नेह दीप्त ममता दुलार प्यार। मृदु-अभिलाषा आस से हृदय संवार || दया करूणा सागर की पावन गहराई | बनकर आत्मीय अनुराग तेरा... आगे पढ़े

एक तमाशा दिखाता हूं

Updated on 24 October, 2015, 16:51
अब मैं आपको कोई कविता नहीं सुनाता  एक तमाशा दिखाता हूं, और आपके सामने एक मजमा लगाता हूं। ये तमाशा  कविता से बहुत दूर है, दिखाऊं साब, मंज़ूर है? कविता सुननेवालो ये मत कहना  कि कवि होकर  मजमा लगा रहा है, और कविताएं सुनाने के बजाय  यों ही बहला रहा है। दरअसल  पापी पेट का सवाल है और देश का ये हाल है कि कवि अब मजमा लगाने... आगे पढ़े

आज सूरज ने कुछ घबरा कर

Updated on 24 October, 2015, 12:46
रोशनी की एक खिड़की खोली  बादल की एक खिड़की बंद की  और अंधेरे की सीढियां उतर गया…. आसमान की भवों पर  जाने क्यों पसीना आ गया  सितारों के बटन खोल कर  उसने चांद का कुर्ता उतार दिया…. मैं दिल के एक कोने में बैठा हूं  तुम्हारी याद इस तरह आयी  जैसे गीली लकड़ी में से  गहरा और काला धूंआ उठता... आगे पढ़े

हिन्दी की व्यथा

Updated on 7 September, 2015, 14:43
वैश्विक धरा पर जाऊं कैसे जमीन पर टूट रहे हैं मेरे पैर मानक होकर भी अमानक मैं, ये कैसी है मुझ से बैर अपने ढाई नुमा अक्षर के साथ, चीनी ने इतिहास रचा चित्रात्मक लिपी होकर भी जापानियों ने हर शब्द जपा हिन्दू होकर भी तुम मुझसे, क्यों इतने ड़रते हो  क्यों उत्साहित हो-हो के... आगे पढ़े

मैं प्रश्न कर रही हूँ गर्भ से,

Updated on 10 June, 2015, 15:23
 मेरे जीवन को छीनने का हक किसने दिया, दादा-दादी को, नाना- नानी को,  जन्म का अंश देने वाले पिता को,  जन्म कर जीवन देने वाली माँ को।   मैं प्रश्न कर रही हूँ गर्भ से मेरे जीवन का लाड़-प्यार सगे संबंधियों का स्नेह-दुलार क्या सिर्फ भाइयों के लिए है।    मैं प्रश्न कर रही हूँ गर्भ से मैं भी हूँ पिता... आगे पढ़े

शहीदों के लहू से रंगी है धरती

Updated on 27 December, 2014, 15:50
शहीदों के लहू से रंगी है धरती कहलाए यह देश मां भारती अगणित नारियों ने दी आहुतियां तब कहीं टूट पायी परतंत्र की बेढि़यां संघर्ष की बेडि़यां हमें है स्वीकार आजादी हेतु लड़ाई रखकर बरकरार मां भारती के आंचल पर आंच न आने दो देशवासियों को चैन से जीने दो गणतंत्र के पावन पर्व पर करें संकल्प छोड़ेंगे नहीं... आगे पढ़े

रंगीली यादों का झरोखा

Updated on 9 August, 2014, 6:26
 कच्चे सूत से बँधी  पक्की डोर है राखी बहना का प्यार और  भाई का विश्वास है राखी  यह किसी पूछ-परख का  रिश्ता नहीं बल्कि  बहना के हक की दरकार है राखी देहरी पर बैठी बहना को  भाई के आगमन के हिलोरे देती  शीतल बयार है राखी  मायके का एक आसरा  सिर पर भाई के हाथ का  सुकून और मीठा अहसास है राखी  जुदाई... आगे पढ़े